Children’s Day Poem in Hindi | बाल दिवस पर कविता हिंदी में

हमने आपके लिए बहुत सारी कविताएं लिखी हैं, जो हमें प्रेरित करेंगी, यह कविता भी अवसरवादी है, आप लोगों के लिए उत्साहवर्धक है, इन सभी कविताओं और Children’s Day Poem in Hindi में आपको अच्छी शिक्षा मिलेगी, हमने ये सभी कविताएं मनोरंजन के लिए लिखी हैं आप।

Children's Day Poem in Hindi

हम भारत में हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस मनाते हैं। भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। चाचा नेहरू के नाम से मशहूर पंडित जवाहरलाल नेहरू को बच्चों से बहुत प्यार था। बच्चों के प्रति उनका प्रेम अत्यधिक था। उन्होंने हमेशा इस बात की वकालत की कि देश के बच्चे पूर्ण बचपन और उच्च शिक्षा के हकदार हैं। बच्चों के प्रति चाचा नेहरू के अपार प्रेम के कारण, 1964 में नेहरू की मृत्यु के बाद 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में घोषित किया गया। यह दिन बच्चों के प्रति प्यार और स्नेह दिखाने के लिए मनाया जाता है।

Children’s Day Poem in Hindi

बाल कविताएं

अक्कड़ मक्कड़, धूल में धक्कड़,
दोनों मूरख, दोनों अक्खड़,
हाट से लौटे, ठाठ से लौटे,
एक साथ एक बाट से लौटे।

बात-बात में बात ठन गयी,
बांह उठीं और मूछें तन गयीं।
इसने उसकी गर्दन भींची,
उसने इसकी दाढी खींची।

अब वह जीता, अब यह जीता;
दोनों का बढ़ चला फ़जीता;
लोग तमाशाई जो ठहरे
सबके खिले हुए थे चेहरे!

मगर एक कोई था फक्कड़,
मन का राजा कर्रा – कक्कड़;
बढ़ा भीड़ को चीर-चार कर
बोला ‘ठहरो’ गला फाड़ कर।

अक्कड़ मक्कड़, धूल में धक्कड़,
दोनों मूरख, दोनों अक्खड़,
गर्जन गूंजी, रुकना पड़ा,
सही बात पर झुकना पड़ा!

उसने कहा सधी वाणी में,
डूबो चुल्लू भर पानी में;
ताकत लड़ने में मत खोओ
चलो भाई चारे को बोओ!

खाली सब मैदान पड़ा है,
आफ़त का शैतान खड़ा है,
ताकत ऐसे ही मत खोओ,
चलो भाई चारे को बोओ।

सुनी मूर्खों ने जब यह वाणी
दोनों जैसे पानी-पानी
लड़ना छोड़ा अलग हट गए
लोग शर्म से गले छट गए।

सबकों नाहक लड़ना अखरा
ताकत भूल गई तब नखरा
गले मिले तब अक्कड़-बक्कड़
खत्म हो गया तब धूल में धक्कड़

अक्कड़ मक्कड़, धूल में धक्कड़
दोनों मूरख, दोनों अक्खड़।

….अक्कड़ मक्कड़ / भवानीप्रसाद मिश्र

चाचा नेहरु प्यारे थे,

Children's Day Poem in Hindi

भारत माता के राजदुलारे थे!,
देश के पहले पधानमंत्री थे,
स्वतंत्रता के सैनानी थे!
अचकन में फूल लगाते थे,

हमेशा ही मुस्काते थे!
बच्चो से प्यार जताते थे!
चाचा नेहरु प्यारे थे!
देश विदेश यह घूमते थे,

बहुत सारी जानकारी प्राप्त करते थे,
फिर भी अपने देश से यह प्यार करते थे!
चाचा नेहरु राजकुमारे थे!
बच्चे इनको सदा प्यार से,

चाचा नेहरू कहते।
चाचाजी इन बच्चों के बीच,
बच्चे बनकर रहते है॥
एक गुलाब ही सब पुष्पों में,

इनको लगता प्यारा।
भारत मां का लाल यह,
सबसे ही था न्यारा॥
सारे जग को पाठ पढ़ाया,

शांति और अमन का।
भारत मां का मान बढ़ाया,
था यह ऐसा लाल चमन का॥

Children’s Day Poem

कितनी प्यारी दुनिया इनकी

कितनी प्यारी दुनिया इनकी,
कितनी मृदु मुस्कान।
बच्चों के मन में बसते हैं,
सदा, स्वयं भगवान।

एक बार नेहरू चाचा ने,
बच्चों को दुलराया।
किलकारी भर हंसा जोर से,
जैसे हाथ उठाया।

नेहरूजी भी उसी तरह,
बच्चे-सा बन करके।
रहे खिलाते बड़ी देर तक
जैसे खुद खो करके।

बच्चों में दिखता भारत का,
उज्ज्वल स्वर्ण विहान।
बच्चे मन में बसते हैं,
सदा स्वयं भगवान।

बच्चे यदि संस्कार पा गए,
देश सबल यह होगा।
बच्चों की प्रश्नावलियों से,
हर सवाल हल होगा।

बच्चे गा सकते हैं जग में,
अपना गौरव गान।
बच्चे के मन में बसते हैं,
सदा स्वयं भगवान।

….कार्तिकेय अमर

बाल-दिवस है आज साथियों

बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल,
जगह-जगह पर मची हुई खुशियों की रेलमरेल.

बरसगांठ चाचा नेहरू की फिर आई है आज,
उन जैसे नेता पर सारे भारत को है नाज.

वह दिल से भोले थे इतने, जितने हम नादान,
बूढ़े होने पर भी मन से वे थे सदा जवान.

हम उनसे सीखे मुस्काना, सारें संकट झेल,
बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल.

हम सब मिलकर क्यों न रचाएं ऐसा सुख संसार,
भाई-भाई जहां सभी हो, रहे छलकता प्यार,
नही घृणा हो किसी ह्रदय में, नही द्वेष का वास,

आँखों में आँसू न कहीं हो, हो अधरों पर हास,
झगड़े नही परस्पर कोई, हो आपस में मेल,
बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल.

पड़े जरूरत अगर, पहन ले हम वीरों का वेश,
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा हमको रहे स्वदेश,
मातृभूमि की आजादी हित हो जाएं बलिदान,
मिट्टी से मिलकर भी माँ की रक्खे ऊँची शान.

दुश्मन के दिल को दहला दे, डाल नाक-नकेल,
बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल…

चाचा नेहरु ने देखे थे

चाचा नेहरु ने देखे थे,
नव भारत के सपने,
सपने पूरे कर सकते थे,
उनके बच्चे अपने.

ऐसी शिक्षा हमें आपसे
ऐसी शिक्षा हमें आपसे
मिली यही सौभाग्य हमारा
मरकर भी हो गया अमर जो
चाचा नेहरू सबका प्यारा

शालाओं में भी होते हैं,
नये नये आयोजन,
जिन्हें देख आनंदित होते,
हम बच्चों के तन मन.

Children’s Day Poems from Teachers

बच्चों के प्याारे थे चाचा नेहरू

बच्चों के प्याारे थे चाचा नेहरू
सबसे न्याकरे थे चाचा नेहरू
अलाहबाद में जन्मेा थे
और इंग्लैण्डज में पढ़े थे

देश की आजादी खातिर
कई दफा जेल गए थे
अपने हुनर के बलबूते वो
देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे

बापू गांधी के प्याेरे थे चाचा नेहरू
पंचवर्षीय योजना दी चाचा ने
नई राह नई चेतना दी चाचा ने
जब प्रथम प्रधानमंत्री बने थे चाचा नेहरू

चाचा जी का सपना था
जब वे पंचतत्वन में लीन हो जाए
उनकी चिंता से राख उठाए
उसको भारत के खेतों में डालें

और कुछ को गंगा में बहाएं
ऐसा करने से वो
भारत की मिट्‌टी में मिल जाएं
सच में बहुत न्या‌रे थे चाचा नेहरू
बच्चों के प्यामरे थे चाचा नेहरू

राष्ट्रवाटिका के पुष्पों में

राष्ट्रवाटिका के पुष्पों में,
एक जवाहरलाल।
जन्म लिया जिस दिन लाल ने,
दिवस कहाया बाल॥

बच्चे इनको सदा प्यार से,
चाचा नेहरू कहते।
चाचाजी इन बच्चों के बीच,
बच्चे बनकर रहते॥

एक गुलाब ही सब पुष्पों में,
इनको लगता प्यारा।
भारत मां का लाल यह,
सबसे ही था न्यारा॥

सारे जग को पाठ पढ़ाया,
शांति और अमन का।
भारत मां का मान बढ़ाया,
था यह ऐसा लाल चमन का॥

बचपन का दौर !

हमको तू लौटा दे केवल बचपने का दौर,
जिंदगी है इतनी ख्वाहिश नहीं चाहिए और।

मम्मी का वह प्यार जताना,
पापा का चॉकलेट ले आना।
बहन भाइयों से लड़ना और,
बात-बात पर रूठते जाना।

मां का कंघी से बाल बनाना,
पापा का कंधे पर बैठाना।
हर छोटी सी चीज को लेकर,
घर वालों का प्यार जताना।

बचपन के वे खेल पुराने,
मित्रों के वे मेल पुराने।
हरे लाल चूरन की पुड़िया,
लाई के वे भेल पुराने।

हर अपने से भाईचारा,
छोटी चीजों में बटवारा।
टिफिन खोल मित्रों के खाना,
झट से छूमंतर हो जाना।

नहीं सही जाती अब पीड़ा जीवन की इस ठौर,
केवल बचपन लौटा दे, कुछ नहीं चाहिए और।

गलियों में क्रिकेट खेलना,
गोल्फ और छिद्दूर।
चोर पुलिस और आइस पाइस,
गिल्ली डंडा, डम-डम खजूर,

ढलते शाम चांद देखना,
मां का लोरी गीत सुनाना।
आजा चंदा मामा कह कर,
घूंट घूंट कर दूध पिलाना।

कहां गए वह सकल नजारे,
हरियाली खुशियाली से।
छलक गए सब मानो जैसे,
जीवन की इस प्याली से।

उम्र बढ़ी, हम बड़े हुए,
पर जीवन से लाचार हुए।
अपनी खुशियां भूल गए,
जिस दिन से जिम्मेदार हुए।

या तो अब बतला दे हमको खुश रहने का कोई तौर,
या फिर लौटा दे वो खुशियां, और मेरे बचपन का दौर।

….सौरभ शुक्ला

Short Poem on Children’s Day

“मुश्किल है इसको भुलाना”

Children's Day Poem in Hindi

बचपन है एक खज़ाना,
जो आता हैं ना दोबारा,
मुश्किल होता है इसको भुलाना!!

वो खेलना खुदना और खाना,
मौज मस्ती में बलखाना,
वो माँ की ममता और पापा का दुलार,
भुलाये ना भूले वो सावन की फुहार,
मुश्किल होता है इसको भुलाना!!

वो कागज़ की नाव बनाना और,
वो बारिश में भीगना,
वो झूले झुलाना और मुस्कुराना,
वो पतंगो का उड़ाना,
मुश्किल होता है इसको भुलाना!!

वो यारो की यारी में सब भूल जाना,
और डंडे से गिल्ली को मारना,
वो अपने पढ़ाई से जी चुराना,
और शिक्षक के पूछने पर अलग अलग बहाने बनाना,
मुश्किल होता है इसको भुलाना!!

वो पेपर में रट्टा लगाना,
उसके बाद नतीजें के डर से बहुत घबराना,
वो दोस्तों के साथ साइकिल चलाना,
वो छोटी छोटी बातो पर रूठ जाना,
मुश्किल होता है इसको भुलाना!!

Buy This Best English Poem Book Now

BUY NOW

बच्चे

द्वेष, कपट, छल से अनजान,
चंचल, मासूम, हठी, नादान।
बच्चे होते कितने प्यारे,
सबकी होते आंख के तारे।

भेदभाव न जानें बच्चे,
तभी तो लगते हैं अच्छे।
फिक्र गमों से दूर रहते,
अपनी मस्ती में चूर रहते।

दुश्मन के दिल को दहला दे, डाल नाक-नकेल,
बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल.

बच्चों की हर एक अदा,
होती है सबसे जुदा।
धरती पर है स्वर्ग वहाँ,
मुस्कुराता है बचपन जहाँ।

….हरिन्दर सिंह गोगना

“बाल-दिवस है आज साथियों”

बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल,
जगह-जगह पर मची हुई खुशियों की रेलमरेल!
जन्मदिन चाचा नेहरू का फिर आया है आज,
उन पर सारे भारत को है नाज!

वह भोले थे इतने, जितने हम हैं नादान,
हमेशा ही मन से वे थे जवान!
हम उनसे सीखे मुस्कुराना, सारें संकट झेल,
बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल!

नही घृणा हो किसी ह्रदय में, नही द्वेष का वास,
आँखों में आँसू न कहीं हो, हो अधरों पर हास!
हम सब मिलकर क्यों न रचाएं ऐसा सुख संसार,
भाई-भाई जहां सभी हो, रहे छलकता प्यार!
झगड़े नही आपस में कोई, हो आपस में मेल,
बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल!

पड़े जरूरत अगर, पहन ले हम वीरों का वेश,
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा हमको रहे स्वदेश!
मातृभूमि के हित के लिए हो जाएं बलिदान,
मिट्टी से मिलकर भी माँ की रक्खे ऊँची शान!
दुश्मन के दिल को दहला दे, डाल नाक-नकेल,
बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल!

बाल दिवस पर कविता

बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल,
जगह-जगह पर मची हुई खुशियों की रेलमरेल.

बरसगांठ चाचा नेहरू की फिर आई है आज,
उन जैसे नेता पर सारे भारत को है नाज.
वह दिल से भोले थे इतने, जितने हम नादान,
बूढ़े होने पर भी मन से वे थे सदा जवान.

हम उनसे सीखे मुस्काना, सारें संकट झेल,
बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल.

हम सब मिलकर क्यों न रचाएं ऐसा सुख संसार,
भाई-भाई जहां सभी हो, रहे छलकता प्यार,
नही घृणा हो किसी ह्रदय में, नही द्वेष का वास,
आँखों में आँसू न कहीं हो, हो अधरों पर हास,

झगड़े नही परस्पर कोई, हो आपस में मेल,
बाल-दिवस है आज साथियों, आओ खेले खेल.

पड़े जरूरत अगर, पहन ले हम वीरों का वेश,
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा हमको रहे स्वदेश,
मातृभूमि की आजादी हित हो जाएं बलिदान,
मिट्टी से मिलकर भी माँ की रक्खे ऊँची शान.

Beautiful Poem on Children’s Day

हम बच्चे प्यारे-प्यारे

हम बच्चे प्यारे- प्यारे हैं।
मां की आंखों के तारे हैं।।
मां के हैं हम लाल।
उसकी आंखों के तारे हैं।।

अगर कभी हम रूठ जाएं।
चंदा मामा को बुलाती है।।
प्यारे -प्यारे गीत सुना कर।
दूध रोटी खिलाती है।।

अगर कभी जब नींद सताए।
लोरी गा के सुलाती है।।
अगर कभी जो हम डर जाएं।
हम को गले लगाती है।।

उछल कूद करते रहते।
हम बच्चे प्यारे-प्यारे हैं।।

….सपना यदु

हम बन जाएँ चाचा नेहरु

बन ठन कर हम कोट पहनते,
जेब में लाल गुलाब रखते।
खिलखिलाते फूल सा हरदम,
चाचा नेहरु से हम लगते।

मेला ठेला देखन जाते,
चाट पकौड़ी मजे से खाते।
नए लिबास में सजधज कर हम,
बाल दिवस पर्व खूब मनाते।

मंच पर हम आलाप लगाते,
महफिल अपनी खूब सजाते।
नाचे गाए रंग जमाएं,
पों पों बाजा ढोल बजाते।

प्रण करते हैं आज के दिन हम,
सच बोलेंगे अब निस दिन हम।
नेकी से हम कभी ना डिगे,
पहले पहल इंसान बनें हम।

दया धर्म हम सदा ही रखते,
मात पिता का मान भी करते।
दिखाए गुरुवर उन राहों पर,
हम आगे को बढ़ते रहते।

हर रंग में हम ढल जाते हैं,
जैसा बनाओ बन जाते हैं।
संस्कारों पर ही चलकर हम,
गुमराह कभी न हो पाते हैं।

काम से कभी न हम घबराते,
अपना काम समय पर करते।
खेल खेल में नलिन ये बच्चे,
बड़े से बड़ा काम कर जाते।

….नलिन खोईवाल

ये भोले भाले बच्चे

ये भोले-भाले बच्चे,
ये मन के होते सच्चे।
ये गम से होते बेगाने,
ये खिलौनों के दीवाने।

इनके साथी हैं खिलौने,
इनको लगते बड़े सलोने।
ये खिलौना ही संसार है,
ये खुशियों का आधार है।

ये फूल से होते प्यारे,
ये रूप के होते न्यारे।
ये माँ के होते दुलारे,
ये माँ-माँ तभी पुकारे।

ये माँ के नन्हें राजा,
ये पिता के युव राजा।
माँ की गोद है भाता,
इसी में हैं मज़ा आता।

माँ की गोद ही संसार है,
यही खुशी का आधार हैं।
इसी में मिलता प्यार है,
माँ में ही ममता दुलार है।

…अशोक पटेल

Funny Poem on Children’s Day

बचपन है ऐसा खजाना

बचपन है ऐसा खजाना
आता है ना दोबारा
मुश्किल है इसको भूल पाना
वह खेलना कूदना और खाना
मौज मस्ती में सालाना
वह मां की ममता और वह पापा का दुलार

भुलाए ना भूले वह सावन की फुहार
मुश्किल है इन सभी को भूलना
वो कागज की नाव बनाना
वो बारिश में खुद को भीगना
वो झूले झूलना और खुद मुस्कुराना

वो यारों की यारी में सब भूल जाना
और डंडे से गिल्ली को मारना
वो अपने होमवर्क से जी चुराना
और टीचर के पूछने पर तरह-तरह के बहाने बनाना
मुश्किल है इनको भूलना……

वो एग्जाम में रखता मारना
उसके बाद रिजल्ट के डर से बहुत घबराना
वो दोस्तों के साथ साइकिल चलाना
वो छोटी-छोटी बातों पर रूठ जाना
बहुत मुश्किल है इनको भुलाना…

वो मां का प्यार से मनाना
वो पापा के साथ घूमने के लिए जाना
और जाकर पिज्जा और बर्गर खाना
याद आता है वह सब जमाना
बचपन है ऐसा खजाना
मुश्किल है इसको भूलना…..

चाचा नेहरू बड़े ही प्यारे

चाचा नेहरू बड़े ही प्यारे,
सबके मन को भाते।
हाथ मे बच्चे गुलाब लेकर,
मन्द-मन्द मुस्काते।

चाचा नेहरू रोज सिखाते,
बच्चों तुम खूब पढ़ना।
माँ भारती के वीर सिपाही,
हम सबको है बनना।

यह देश हमारा सबसे प्यारा,
नही किसी से झगड़ना।
मिलजुल के रहना है सबको,
दुनिया से आगे है बढ़ना।

आओ मिलकर एक शपथ ले,
भारत को स्वच्छ बनाना है।
हम माँ भारती के वीर सिपाही,
अपना कर्तव्य निभाना है।

चाचा नेहरू का यह संदेश,
सभी जगह फैलाना।
जन जन को यह पता चले,
भारत को स्वर्ग बनाना।

….अहिबरन पटेल

Poems about Children’s Day

चाचा नेहरू के जन्मदिन पर

चाचा नेहरू के जन्मदिन पर,
बाल दिवस कब मनाया जाता
बाल दिवस लाता है खुशियों का त्योहार
इसमें बच्चे पाते हैं बहुत ढेर सारा प्यार

नेहरु चाचा करते थे हम बच्चों से प्यार
क्योंकि बच्चों का दिल होता है पूरी तरह से साफ
चाचा नेहरू का था सिर्फ एक ही सपना
पढ़ने में आगे हो अपने देश का हर एक बच्चा बच्चा

क्योंकि भारत के बच्चे हैं फ्यूचर इस देश के
एजुकेशन से होता कल्याण इनका
बाल दिवस के मौके पर सभी बच्चे को यह वादा है निभाना
चाचा नेहरू के सपनों को सच करके हैं दिखाना……

बाल दिवस

Children's Day Poem in Hindi

चौदह नवंबर जन्म हुआ है,
वो चाचा कहलाते हैं।
बच्चे सब मिल इस शुभ दिन को,
बाल दिवस मनाते हैं।

नेहरू चाचा की थी इच्छा,
ज्ञान और विज्ञान बढ़े।
बच्चे बनकर नौनिहाल,
भारत माँ का उत्थान करें।

चाचा ने ये कहा था बच्चों,
तुम गुलाब सम खिल जाना।
अपनी सौंधी खुशबू से,
इस देश की बगिया महकाना।

इस दिन होती हैं स्पर्धा,
पुरस्कार वितरण होते।
वीर-बहादुर बच्चों के यहाँ,
नाम सभी उज्ज्वल होते।

भारत में हम इस शुभ दिन को,
धूमधाम से मनाते हैं।
मेले लगते जगह-जगह,
चाचा के गीत सुनाते हैं।

….सुशीला शर्मा

Also Read-

हमें उम्मीद है कि आपको हमारी ये कविता पसंद आई होगी. Children’s Day Poem in Hindi में हमने अपनी वेबसाइट पर आपके लिए प्यारी कविताएं लिखी हैं, अगर आपको हमारी कविता पसंद आती है तो कृपया कमेंट करें। पूरी कविता पढ़ने के लिए धन्यवाद.

Leave a Comment